कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0615

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वक़्त तो चलता रुकता रहता है

वक़्त तो चलता रुकता रहता है ..... अब मैं भी आना जाना सीख गई हूँ सुकून ......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें