कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0603

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इक वक़्त ही है जिसे ये कहना अच्छा लगता है ....मुझमें गुज़रते…

इक वक़्त ही है जिसे ये कहना अच्छा लगता है ....मुझमें गुज़रते रहे साल भर फिर भी रुके रहे तुम मुझमें .... लेखा जोखा रखना शायद कभी मैंने सीखा ही नहीं । आप सब नए पुराने दोस्तों का शुक्रिया । शुक्रिया मेरे शब्दों का जो साल भर मेरे इश्क़ में डूबे रहे । शुक्रिया साथी कलमकारों का जिन्होंने सराहा भी और इक नया आसमान शब्दों का मेरे सराहने के लिए रख छोड़ा । के सी जी आप इस साल मेरे लिए अनमोल खोज रहे । मेरे हर प्रयास में आप सभी का साथ मुझे नए साल में भी लिखने के लिए प्रेरणा देते रहेगा इन्हीं शब्दों के साथ कल्पना का शुक्रिया 😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें