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रचना 0579

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ये भी ठीक है

ये भी ठीक है ... जवाब ना भी लौट कर आया तुम्हारा तो क्या इक उमींद तो लौट ही आयी कि .... अभी भी कुछ कुछ रेत सा कुछ कुछ राख सा कुछ कुछ अब्र सा कुछ कुछ सब्र सा बाक़ी है ......दरमियां इंतज़ार .....रुका हुआ भी कायम रहेगा और...... इंतेहा भी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें