कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0573

भाषा / Language

Darpan Sah ji ...आज आपकी लुका-झांकी पढ़ी ... प्रेम को बिलकुल…

Darpan Sah ji ...आज आपकी लुका-झांकी पढ़ी ... प्रेम को बिलकुल अलग नज़रिये से देखती है आपकी कवितायेँ ..... बेहद अलग सोच ... पहली कविता शून्य से शुरू हुई और चौबीस पर ख़त्म .....पर बीच में साठ भी था और चौहत्तर भी .....उनसठ भी और अड़तालीस भी ....😊😊😊😊😊😊 अपने पसंदीदा पेज पहले मोड़ लिए फिर कैमरे में कैद कर लिए ..... Your one liners are really terrific......thoughtful and beautifully crafted......👌👌👌👌 लेखनी का जादू बरक़रार रहे ..... किसी दिन अल्मोड़ा की वादियों को भी पिरो दीजियेगा ....waiting😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें