कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0572

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मेरे किरदार

मेरे किरदार और मेरे शब्दों को सटीक तरह से परिभाषित करना ही.... मेरी मौजूदगी का एहसास कराएगा कलम ने ..........पाती से कहा...... पर सुना....... मैंने और तुमने भी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें