कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 0567

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बोलो ....किस पर इलज़ाम लगाऊं

बोलो ....किस पर इलज़ाम लगाऊं ? खुद पर या ...इन शब्दों पर या फिर... उन खामोशियों पर जो तुम रख कर जा रहे हो मुझे आदत है तुम्हारी और ...... ये शब्द और खामोशियाँ आदी हैं मेरी सब तुम्हारी वजह से थम गया इतनी सारी जगह उग आई है यहाँ अब इसमें क्या भरूं .... शब्दों का सन्नाटा या .....खामोशियों की गूँज
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें