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रचना 0547

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चाँद खोता .....तो मिल भी जाता

चाँद खोता .....तो मिल भी जाता तुम तो जुदा हो गए चाँद भी ना हुए मेरे .....और खुदा भी हो गए
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें