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रचना 0546

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इन आँखों ने ......ताउम्र इक इंतज़ार जिया है

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इन आँखों ने ......ताउम्र इक इंतज़ार जिया है इन होठों ने ........ताउम्र इक इज़हार सिया है शायद कागज़ पर...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें