कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0541

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सोचती हूँ ....दिया क्या जलाऊँ

सोचती हूँ ....दिया क्या जलाऊँ ? मेरा वजूद काफी होगा....... तुम्हारा हर "तम" हरने के लिए
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें