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रचना 0536

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तुमने मेरा रंग ओढ़ा

तुमने मेरा रंग ओढ़ा और मैंने तुम्हारी रौशनी पहन ली रस्म थी शायद ....आखरी मुलाक़ात वाली जुगनू तितली का सच गढ़ा है ..... देखो कुछ समझ आये तो .... मेरे इश्क़ सा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें