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रचना 0529

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पहले ......वक़्त रोक दिया करते थे दरमियां

पहले ......वक़्त रोक दिया करते थे दरमियां अबके मिले तो .......उम्र रोक कर रख दी मेरी बिंदिया आज भी ....सुर्ख ही भाती है ना तुम्हें ? Savita Ashok Agarwal जी आपकी अनमोल कृति के लिए 😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें