भाषा / Language
पहले ......वक़्त रोक दिया करते थे दरमियां
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पहले ......वक़्त रोक दिया करते थे दरमियां
अबके मिले तो .......उम्र रोक कर रख दी
मेरी बिंदिया आज भी ....सुर्ख ही भाती है ना तुम्हें ?
Savita Ashok Agarwal जी आपकी अनमोल कृति के लिए 😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें