भाषा / Language
मुझे देखना..... जितना आसान है
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मुझे देखना..... जितना आसान है
पढ़ना...... उतना ही मुश्किल
उस रोज़ .....यूँ ही मैं शब्दों से कह बैठी
रात महफ़िल में इक ही ग़ज़ल परवान चढ़ी ....
इश्क़ की दास्तां है प्यारे ......
अपनी अपनी जुबां है प्यारे .......
और .....
मैं अपने शब्दों को निहारती रही
शब्द मुझसे बुदबुदाते रहे
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें