कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0521

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बादलों में

बादलों में कल्पना के चित्र ढूंढ रही हूँ सबको अजीब खुद को विचित्र ढूँढ रही हूँ ..... वो .....जज़्बा वो..... जज़्बात ढूँढ रही हूँ कभी खुद में कभी दूसरों में एक ......हालात ढूँढ रही हूँ वो...... प्यार वो .....अधिकार ढूँढ रही हूँ कभी खुद में कभी दूसरों में एक ....व्यवहार ढूँढ रही हूँ वो ....मजबूर वो ......मजदूर ढूँढ रही हूँ कभी खुद में कभी दूसरों में एक .....मसरूफ ढूँढ रही हूँ वो.... मैं वो ......आप ढूँढ रही हूँ कभी खुद में कभी दूसरों में एक..... सुर्खाब ढूँढ रही हूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें