कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0516

भाषा / Language

दो आखर की "कविता".... देखना चाहो

दो आखर की "कविता".... देखना चाहो..... तो ये लो ...."आइना " पर.... इक गुज़ारिश है ..... कुछ पल ...."नैन" मेरे धर लो दो आखर की "कविता " से हो ......"तुम" "मैं" नहीं..... मेरी "कलम " कहती है ......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें