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रचना 0502

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ज़िन्दगी की सुबह को मिले

ज़िन्दगी की सुबह को मिले दोपहर तक रुके साँझ को चले गए अब लौटे हो ज़िन्दगी की रात के साथ तुम्हें बीता नहीं ....जीता है ज़िन्दगी ....मैंने ....रोज़
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें