भाषा / Language
आज कुछ अलग .... 😊😊😊😊
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आज कुछ अलग .... 😊😊😊😊
तो बस चलते रहो मुझमें .....
तुम मेरी कहानी का वो मुड़ा हुआ पन्ना हो जो चल रहा है मेरे साथ ।
ज़रा ज़रा पीला हुआ है ,पर मुझे तो अपने साथ सुफेद होता दिख रहा । शायद बुढा रहा है मेरे साथ ।
तुम कभी इत्तेफाक हो ही नहीं सकते मेरी कहानी में
तुम इक सोची समझी साजिश हो जिसमें इश्क़ ने मुझे चुना और मैं तुम पर फ़िदा हो गयी ।
अब कहानी अगर आगे चले नहीं तो बिखर जायेगी ।
इसलिए जब तक मैं हूँ ......
तुम्हारा मुड़ा पन्ना मेरा all time favourite रहेगा ।
तो बस चलते रहो मुझमें .....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें