कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0501

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आज कुछ अलग .... 😊😊😊😊

आज कुछ अलग .... 😊😊😊😊 तो बस चलते रहो मुझमें ..... तुम मेरी कहानी का वो मुड़ा हुआ पन्ना हो जो चल रहा है मेरे साथ । ज़रा ज़रा पीला हुआ है ,पर मुझे तो अपने साथ सुफेद होता दिख रहा । शायद बुढा रहा है मेरे साथ । तुम कभी इत्तेफाक हो ही नहीं सकते मेरी कहानी में तुम इक सोची समझी साजिश हो जिसमें इश्क़ ने मुझे चुना और मैं तुम पर फ़िदा हो गयी । अब कहानी अगर आगे चले नहीं तो बिखर जायेगी । इसलिए जब तक मैं हूँ ...... तुम्हारा मुड़ा पन्ना मेरा all time favourite रहेगा । तो बस चलते रहो मुझमें .....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें