भाषा / Language
कुछ प्रश्न
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कुछ प्रश्न ...
अपने अंतस में लिए लिए फिरती हूँ ....
कभी जुबां साथ नहीं देती
कभी नैन
निरुत्तर रहती हूँ .....अमूमन
परत दर परत
प्रश्नों की परत
तुम्हारे लिए यदा कदा
मेरे लिए ही..... क्यूँ अनवरत ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें