ककल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0450

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बस

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बस ..... कुछ शब्द ही हैं .... जो बिना शर्त मुझे ....हूबहू लिख देते हैं तुम्हारी ख्वाइशों पर बाक़ी सब तो ..... फरमाइशी ग़ज़ल सा है मेरे लिए
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें