कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 0449

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मैं थी

मैं थी ...... मैं हूँ ....... मैं रहूंगी ....... इनके बीच के फासलों में शब्दों का कोलाहल भरा था ..... भरा है ..... भरा ही रहेगा ..... और बस.... इक "कल्पना "होंगी .... निर्वात लपेटे
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें