भाषा / Language
बात इतनी सी थी की तुम अच्छे लगे
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बात इतनी सी थी की तुम अच्छे लगे
एक दिल होने की खबर अफवाह निकली
लौट लौट के तेरा मुझे कोस के जाना
उफ्फ्फ ! ये मुहब्बत की परवाह निकली
ज़िन्दगी भर उसका घर सहेजे रखा
चुटकी भर सिन्दूर मेरी तनख्वाह निकली
कागज़ पे यूँ ही चंद एहसास रंग दिए
मेरे मेहबूब के लिए सब की वाह निकली
दुआओं से उजली की थी बेटे की तक़दीर
बुढ़ापे में खुद माँ की स्याह निकली
नन्हे परिंदे तो उड़ चले आकाश छूने
आज फिर तनहा दरख़्त की आह निकली
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें