भाषा / Language
मेरी हथेलियाँ खोलकर
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मेरी हथेलियाँ खोलकर
मुस्कुराते हुए
तुम हर बार
कुछ मेरा सा रख देते हो
ये कहकर की "its for u "..... कल्पना !
हर बार
इक नयी कल्पना
कैसे गढ़ लेते हो अपने लिए
"ख्वाबों ".....तुम awsome हो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें