कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0431

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मेरी हथेलियाँ खोलकर

मेरी हथेलियाँ खोलकर मुस्कुराते हुए तुम हर बार कुछ मेरा सा रख देते हो ये कहकर की "its for u "..... कल्पना ! हर बार इक नयी कल्पना कैसे गढ़ लेते हो अपने लिए "ख्वाबों ".....तुम awsome हो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें