कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0429

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आदतन तुम कहोगे नहीं

आदतन तुम कहोगे नहीं .... और आदतन मैं पूछूंगी नहीं..... लफ़्ज़ों को "बेमायना" करना भी क्या कम हुनर है ? वो भी..... बेबाक सन्नाटों में
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें