कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0419

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कभी "विश्वास" को ध्यान से सुनियेगा

कभी "विश्वास" को ध्यान से सुनियेगा ..... "विश्व "भी चीखता नज़र आएगा "स्व" भी बोलता नज़र आएगा ये हम पर निर्भर है कि ... हमारी "आस "को किसकी गूँज ज्यादा भाती है किसकी आवाज लौट लौट कर आती है विश्वास तब बोलता नहीं सिर्फ कर के दिखाता है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें