कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0401

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कान्हा

कान्हा "...... कौन सा रिश्ता बाँधूँ तुमसे ? कौन सा बंधन जोडूँ ? ऐसा क्या कह दूं ......जो सुनना चाहती हूँ ऐसा क्या सुन लूं ......जो कहना चाहती हूँ "यमुना" ..... ? यमुना कहाँ है कान्हा .....हमारे तुम्हारे बीच देखो इक सागर लोटता है यहाँ "राधा" और "कान्हा" के दरमियाँ तुम्हारे और मेरे दरमियाँ शब्द का ..... प्रारभ्द का...... देह का ..... स्नेह का ...... आभार का ..... स्वीकार का .... लाओ ..... आज फिर इस "मोरपंख" से मुझ पर कान्हा लिख दो कल मिलने का फिर इक बहाना लिख दो कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें