कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0392

भाषा / Language

शुक्रगुज़ार हूँ

शुक्रगुज़ार हूँ तेरी पनाहों की , तेरे संग गुज़रती राहों की मेरे लिए अनमोल फरिश्ता है तू , मेरी हर ख्वाइश में रंग भरता है तू तू पतंग , तेरी डोर हूँ मैं , बेफिक्र रह सिर्फ तेरी और हूँ मैं सज़दा उन पलों का हम तुम्हारे हुए , फक्र उन लकीरों का आप हमारे हुए शिकन और सुखं , स्वाद चखे हैं तुझ संग , इत्मीनान है ,सुर्ख है हमारे इश्क का रंग तू सीप ..... मुझे मोती सा ढांके रखना , अनमोल सा "यूँ" ही आंके रखना
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें