भाषा / Language
शुक्रगुज़ार हूँ
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शुक्रगुज़ार हूँ
तेरी पनाहों की ,
तेरे संग गुज़रती
राहों की
मेरे लिए अनमोल
फरिश्ता है तू ,
मेरी हर ख्वाइश में
रंग भरता है तू
तू पतंग ,
तेरी डोर हूँ मैं ,
बेफिक्र रह
सिर्फ तेरी और हूँ मैं
सज़दा उन पलों का
हम तुम्हारे हुए ,
फक्र उन लकीरों का
आप हमारे हुए
शिकन और सुखं ,
स्वाद चखे हैं तुझ संग ,
इत्मीनान है ,सुर्ख है
हमारे इश्क का रंग
तू सीप .....
मुझे मोती सा ढांके रखना ,
अनमोल सा
"यूँ" ही आंके रखना
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें