भाषा / Language
झूठ क्यों कहूँ
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झूठ क्यों कहूँ....
होता है मेरे साथ .... कई बार
कोशिश करती जाती हूँ ....
फिर- फिर हारती जाती हूँ .....
इक बार नहीं..... कई बार ...
पर....
कोई .....रहता है मुझमें
जो मुझे कहता है .....
तू रुक कल्पना ! ....मैं तेरे लिए पानी लाता हूँ....
जाने ....."अहम" है वो मेरा .....
या ....
वो .... सिर्फ मेरा "वहम"
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें