कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0361

भाषा / Language

झूठ क्यों कहूँ

झूठ क्यों कहूँ.... होता है मेरे साथ .... कई बार कोशिश करती जाती हूँ .... फिर- फिर हारती जाती हूँ ..... इक बार नहीं..... कई बार ... पर.... कोई .....रहता है मुझमें जो मुझे कहता है ..... तू रुक कल्पना ! ....मैं तेरे लिए पानी लाता हूँ.... जाने ....."अहम" है वो मेरा ..... या .... वो .... सिर्फ मेरा "वहम"
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें