भाषा / Language
मैं .....तुम में ....."गुम" रहती हूँ
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मैं .....तुम में ....."गुम" रहती हूँ
और
तुम...तुम मुझमें ......"गायब "
मेरे जैसे बन जाओगे ....जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा ....
कभी "ग़ज़लें" भी..... सुन लिया करो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें