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रचना 0359

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मैं .....तुम में ....."गुम" रहती हूँ

मैं .....तुम में ....."गुम" रहती हूँ और तुम...तुम मुझमें ......"गायब " मेरे जैसे बन जाओगे ....जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा .... कभी "ग़ज़लें" भी..... सुन लिया करो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें