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रचना 0358

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इक शख्सियत

इक शख्सियत...... जब से ज़हन में उभार ली मैंने फिर.... उम्र क़तरा क़तरा उधार ली मैंने
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें