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रचना 0353

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ख्वाब" ..... "चाँद" ही तो हैं

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ख्वाब" ..... "चाँद" ही तो हैं संगेमरमर सरीखे चटक न जाएँ .... इसलिए ...वो ................................ "ऊंची अटारी" पर रखे हैं आसान तो नहीं है ........ख़्वाबों के उस पार जाना जमीं पर रहकर ........अनगिनत "चाँद" पाना पर..... मुमकिन भी तो है .....ख़्वाबों के उस पार जाना जमीं पर रहकर...... उस "चाँद "का दीदार पाना
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें