कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0345

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मीलों लंबा दिन

मीलों लंबा दिन .... और .... चुटकी भर रात ..... तू ख्वाब कब देखती है ज़िन्दगी ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें