कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0332

भाषा / Language

रोज़ चंद पल...... आईने संग गुज़ारा कीजिये

रोज़ चंद पल...... आईने संग गुज़ारा कीजिये खूबसूरती नहीं .....अक्स को निहारा कीजिये खुद से बातें करना भी ..........इश्क़ियत सा है कभी आत्मा ...कभी वजूद को इशारा कीजिये कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें