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रचना 0303

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कुछ है "हसीं "मुझमें

कुछ है "हसीं "मुझमें .... जो छलता है .....बहुत " ख्वाब " होगा शायद ..... जो बदलता है .....बहुत Kalpana 😀😀😀😀😀😀
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें