भाषा / Language
चख के देखा
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चख के देखा .....
आज भी ....
तुम्हारे लिखे खतों का ......
ज़ायक़ा वही है......
बस जरा .....
चाश्नी कम .....नमक ज्यादा हुआ
क्या करूँ ?
बहते .....
गीले .....
सीले......
लफ़्ज़ों का
अब लहज़ा यही हुआ
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें