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आज यादों की कतरनें

आज यादों की कतरनें..... क्या टांग दी दरीचे से तमाम दिन से ..... रिस रहा है उदास पानी सुना था ..... कि भीगी चीज़ें जलती नहीं पर ....... कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें