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अपने "माज़ी "के चिपके पन्नों
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अपने "माज़ी "के चिपके पन्नों
को पलट के देखो
फूंक मारो .....कुछ है ....
जिला के देखो
उस मुड़े पन्ने के नीचे
तुम्हारी "मुहब्बत "है
अगर सोई है तो .....उठा के देखो
उठी है तो ......सहला के देखो
एक बार फिर इश्क करके देखो
आज उन पन्नों को उड़ा कर देखो
माज़ी से दिल लगा के देखो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें