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रचना 0275

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तुमको चाहा

तुमको चाहा ...... "वजह"....बहुत हैं पर .... खुद को चाहने की ...... इक ही "वजह"..... तुम्हें चुनकर ......."मुख़्तसर" हो गए © कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें