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रचना 0261

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इश्क में सिक्का

इश्क में सिक्का ..... जब भी उछाला ..... जीत मेरी हुई इस तरफ ....आप ...."ख्वाब" से थे उस तरफ..... ख्वाब ...."आप" से थे © कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें