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अमूमन

अमूमन .... रोज़ ही भरती हूँ .... खुद को .....तुम्हारी गागर में बैरी पिया .... फर्क बूझ रहे ..... दरिया में …मेरे सागर में © कल्पना पाण्डेय Happy karwa chauth .... To all my beautiful friends ...... Enjoy
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें