कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0245

भाषा / Language

दिल चाहे भरा हो ,इक कोना तो खाली होगा

दिल चाहे भरा हो ,इक कोना तो खाली होगा जहाँ तूने उस याद को ,सलीके से धरा होगा बेशक तू मशहूर होगा , लूटने के फन में मुझे तो वही पायेगा ,जो मुझसा खरा होगा वीरानियों से ऊब गयी ,नया घर चाहिए सिर्फ एक कमरा ,जो दोस्तों से भरा होगा इस आस से माँ ने ,सींचे रखा था ठूँठ पोंधा छाँव ना दे ,लगाव ही देगा ,जब भी हरा होगा अपने से कहते रहे ,बस अपनी ही सुनते रहे कुछ इशारा ,गूंगी तन्हाई ने भी करा होगा मुहब्बत का शायर है वो ,बस नाम भर का उसका इश्क ,हर ग़ज़ल के साथ मरा होगा © कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें