कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0194

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"मैं

"मैं "... के साथ "तुम" वाले लम्हों से भरी पड़ी है .....मेरी डायरी आज ..... "मैं" .... के साथ "मैं" वाला लम्स ...... ढूँढने निकली हूँ सुना है .... मेरा ...."मैं" भी गज़ब खूबसूरत है लम्स..... Sense of touch
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें