भाषा / Language
मुझमें .....कुछ भी नया नहीं
✦
मुझमें .....कुछ भी नया नहीं
सब पुराना है
यादों वादों का सफ़र ....
ठिठका पड़ा है
तुम्हारे लम्हों का शजर ....
कुम्हला पड़ा है
गौर से देखो .....
मैं ....
आज भी वही ....
तुम्हारा ....
रुका हुआ शहर हूँ
अब तक तुम्हें ....
जाते हुए ....
देख रहा प्रहर हूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें