भाषा / Language
कुछ दिनों से कुछ लिखा नहीं
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कुछ दिनों से कुछ लिखा नहीं ....
कागज़
कलम
स्याही
सब को अवकाश दे दिया
सोचा था ...आराम पाएंगे
ज़रा घूम के आएंगे
वो ताज़गी लाएंगे
फिर ....
कुछ नयी बात होगी
एहसासों की
अलग सौगात होगी
इक बार फिर
मेरा हर लफ्ज़ पे ....
"क्या बात .... क्या बात होगी"
आज खाली कोरे मन से
कुछ लिखना चाहा
इक "लफ्ज़ "स्याही बोली ……
वही "लफ्ज़ "कलम बोल पड़ी ....
मैं क्या करती
इक "लफ्ज़" मैंने भी लिख दिया …
और कागज़ पर
"तुम .....सिर्फ .....तुम "
लिखा नज़र आया
अब सोचती हूँ ....
कागज़
कलम
स्याही को
अवकाश देना फ़िज़ूल रहा
और मेरा मन ...
मेरा मन भी ....वही का वही रहा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें