भाषा / Language
कुछ कर दिखाओ
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कुछ कर दिखाओ.......
किस शाख पर टंगा है
खुशहाली का सपना
तेरा मेरा नहीं
हम सब का अपना
उस साख को हिलाओ
पत्तों पर पड़ी बूंदों को
हथेली पर जमाओ
हर ओस को
आस बनाओ
हर आस को
विश्वाश बनाओ
किस अर्श पर खीचीं हैं
उमीदों की तरंगे
तेरी मेरी नहीं
हम सबकी उमंगें
इन तरंगों को
इकठा कर लाओ
अद्भुत सी इक
धुन बनाओ
साज़ ना सही
संग ही गाओ
आज नया
इक राग बनाओ
Aaj kuch naya ab tak likha nahi to meri ik purani rachna post kar rahi hoon
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें