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रचना 0167

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सुबह से रात गुज़र जाती

सुबह से रात गुज़र जाती इस ज़िन्दगी को "ताकते" हुए वो भी बाज़ नहीं आती हर पल मुझे "आंकते" हुए कौन साहिल ? कौन है समुंदर ? "तखल्लुस " टांकना मुश्किल है कभी वो मुझमें है कभी मैं उसके अंदर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें