भाषा / Language
नारी____
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नारी____
ईश्वर ने मुझको बड़ी फुर्सत में बनाया
कई बार सोचा
फिर मुझमें कुछ जादुई लगाया
ऐसी मिटटी से बनाया
जिसमें कमाल की लोच थी
ऐसी ममता दी जिसमें
बस एक सामान सोच थी
ऐसा स्पर्श दिया की
सारा दर्द घट जाए
ऐसा वजूद दिया की ....पानी
कभी बर्फ ,कभी भांप सा बंट जाए
ऐसी कोमलता दी की
अहम् छू ते ही पिघल जाए
ऐसी सहनशीलता दी की
मुसीबत मिलते ही गल जाए
ऐसा नजरिया दिया की
स्वार्थ सामने न टिक पाये
ऐसे आंसू दिए की
जो घातक अश्त्र कहलाये
ऐसा वज्र दिया की
पीड़ा खुद में ही सिमट जाए
ऐसा रूप दिया की
पत्थर भी लिपट जाए
ऐसा पैमाना दिया की
खूबी - कमियां तोलती जाए
ऐसा सब्र दिया की
नाराज़ भी हो तो बोलती जाए
ऐसा लिहाज़ दिया की
हर उम्र की सुनती जाए
ऐसा नक़ाब दिया की
तन्हा भी खुबसूरत नज़र आये
तूने सब कुछ दिया ईश्वर
थोडा "फक्र" भी दे देता
" मैं" इतना कुछ हूँ
इसका थोडा "इल्म "तो दे देता
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें