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रचना 0146

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इन वीरान

इन वीरान रिश्तों में भी खुदा ने कितना कुछ "शादाब" रखा है कभी तुम्हें ......मेरा "मैं" और कभी मुझे.....तुम्हारा "आप " रखा है Gm
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें