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रचना 0110

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मुकम्मल जहाँ दे ना दे ....ऐ खुदा

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मुकम्मल जहाँ दे ना दे ....ऐ खुदा मुकम्मल सुकून बक्श दे मखमली रहगुजर बना लूं अपनी मुस्कुराता मेरी ज़िन्दगी में हर शक्श दे
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें