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रचना 0102

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मैं लफ़्ज़ों से तस्वीर बनाने में मसरूफ हूँ

मैं लफ़्ज़ों से तस्वीर बनाने में मसरूफ हूँ तस्वीर को लफ्ज़ देने में दुनिया मशगूल तवज्जो का हक़दार है कौन भला ? शायद मेरी तस्वीर , कि मेरे लफ्ज़ , या कि मैं ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें