भाषा / Language
सफ़र
✦
सफ़र ......
आज फिर
उन आँखों की हसरतें
मुझ तक
रफ्ता रफ्ता पहुँची
और
क़तरा क़तरा
पिघळ गयी
मुझ तक
पहुँचने से पहले
गीली गीली
रुक गयी
मेरी आँखों में
सूख सूख गयी ---
मोम सी
उसकी
ख्वाइश
उसकी आँखों से
मेरी आँखों
के "सफ़र "में
जली
पिघली
सिमटी
आज फिर
राख हुई
ख्वाइश
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें