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रचना 0067

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चार कदम मुक्तक .... "हुद हुद "के विध्वंस पर आधारित

चार कदम मुक्तक .... "हुद हुद "के विध्वंस पर आधारित अपने समंदर को समझाया करो लहरों, तुम भी तैश न खाया करो झगड़ा घरेलु होता है तुम्हारा अपने ही घर में निपटाया करो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें